Internal Linking क्या है और इसे बनाने से क्या फायदा होता है

internal linking kya kaam karta hai

सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन के बेसिक बातों को सीखने के दौरान बहुत से टर्म्स को हम नजरअंदाज कर देते है।

ऐसा इसलिए होता है, क्योंकि हम किसी टर्म्स के इम्पोर्टेंस नहीं जानते है।

इसी में से एक टर्म है- Internal Linking, जो पेज रैंकिंग के लिए बेहद जरूरी है।

तो आज के इस पोस्ट में आप जान पाएंगे यह क्या होता है? इसका क्या फायदा है और इसके किस तरह से लिखे, ताकि इसका पूरा फायदा हमारे ब्लॉग को मिल सके।

तो सबसे पहला सवाल है?

इंटरनल लिंकिंग क्या है?

एक ही डोमेन (ब्लॉग या वेबसाइट) के (किसी एक पेज को दूसरे पेज से जोड़ना ही) internal linking कहलाता है।

दरअसल यह एक HTML Code होता है, जिसमे एक Attribute होता है।

<a href=http://richblog.tech/amazon-flex"/>Amazon Flex<\a>

यह एक ऐसा टैक्टिक्स है, जो किसी साइट के ऑथोरिटी को इंप्रूव करने में बहुत मदद करता है।

Moz के अनुसार

Internal links are links that go from one page on a domain to a different page on the same domain.

नोट: जब आप अलग-अलग डोमेन के पेजों को एक-दूसरे से जोड़ते है, तब यह external linking कहलाता है।

अब सवाल है इंटर्नल लिंक की पहचान कैसे की जाए?

इंटर्नल लिंक की पहचान

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यहां पर जितने भी ब्लू कलर में टेक्स्ट है, वह एक लिंक है, जिसे Anchor Text कहते है।

नोट: क्लिक करने वाले टेक्स्ट को एंकर टेक्स्ट कहते है।

यह लिंक किसी पेज का यूआरएल हो सकता है, जिस पर टैप करने के बाद किसी और पेज पर आप रेडायेक्ट हो जाते है।

हालांकि यह लिंक Internal/External दोनों हो सकता है, लेकिन इसके पहचान के लिए आपको उस एंकर टेक्स्ट पर लगभग 5 सेकंड्स टैप करके रखना पड़ेगा या डेस्कटॉप पर माउस से राइट क्लिक।

इस पर क्लिक करने के बाद एक ऑप्शन पेज खुलेगा

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जिसमे ऊपर दिए गए इमेज का ऑप्शन होगा।

आप देख सकते है कि मैं इस वक्त Ahrefs का ब्लॉग पढ़ रहा था, इसी ब्लॉग के किसी एंकर टेक्स्ट पर क्लिक करने के बाद यह डायलॉग पेज खुला है।

इमेज में Ahrefs.com का URL भी दिखाई दे रहा है, जिससे सीधा समझा जा सकता है कि यह Internal Link है।

लेकिन अगर किसी दूसरे साइट का URL है, तो यह एक्सटर्नल लिंक है।

इंटरनल लिंकिंग की जरूरत

अक्सर ऐसा हम देखते है, कि किसी तेक्सटयूल लिंक का रंग, बाकी टेक्स्ट से अलग होता है और कन्टेंट काफी अच्छा दिखाई देता है।

पर इसका बस शो ऑफ वाला काम नहीं है।

गूगल वेबमास्टर गाइडलाइन के अनुसार

Google must constantly search for new pages and add them to its list of known pages. Some pages are known because Google has already visited them before. Other pages are discovered when Google follows a link from a known page to a new page.

बिंग वेब मास्टर के अनुसार

Bing’s crawler (Bingbot) follows links within your website (internal links) or from other sites (external links) to help Bing discover new content and new pages on your site.

यहां पर इस स्टेटमेंट को पढ़कर आप समझ सकते है, कि गूगल बोट या बिंग बोट, इंटरनल लिंक का इस्तेमाल न्यू पेज को डिस्कवर करने में करता है, पुराने पेज को फॉलो करते हुए।

एक तरह से यह नविगेशन (कंटेंट कंपास) का काम करता है।

इसके अलावा इसके और भी फायदे है, जो आपको पता होना चाहिए।

नेविगेशन

यह किसी साइट को बेहतर तरीके से नविगेट करने का काम करता है, इसका फायदा होता यह है कि यूजर बेहतरीन तरीके से साइट में कंटेंट खोज पाता है, जो किसी भी साइट के लिए अच्छा है।

इसके अलावा वह relevancy post को भी पढ़ पाता है, बिना सर्च किए।

पेज व्यू टाइम

पेज व्यू से मतलब है एक ही यूजर किसी साइट के कितने पेज को विजिट करता है।

पेज व्यू बढ़ने से किसी साइट का एवरेज टाइम भी बढ़ता है, जो इसके ग्लोबल रैंकिंग को इंप्रूव करने में मदद करता है।

जैसे मान लिए जाए दो साइट: A और B, जिसमें (A साइट का सिंगल विजिटर द्वारा टोटल व्यू टाइम 5) है और (B साइट का सिंगल विजिटर द्वारा टोटल पेज व्यू टाइम 10 है)।

तो साइट B का टोटल एवरेज टाइम साइट A से दोगुना होगा।

बाउंस रेट

बाउंस रेट का मतलब है किसी पेज को विजिट करना, फिर बिना किसी और एक्टिविटी (Visiting Different Page, Clicking Link) किए बिना वापस आ जाना होता है।

इसके अलावा ब्राउज़र टैब को बंद करना, किसी और साइट को विजिट करना भी बाउंस रेट कहलाता है।

एस्पेशली बाउंस रेट किसी वेबसाईट या ब्लॉग का रीडर्स के लिए इंफॉर्मेटिक्स नहीं होना शामिल है और इसी वजह से यूजर करेंट पेज को किल कर देता है।

लेकिन इंटरनल लिंकिंग के द्वारा आप इस तरह के बाउंसिंग को कम कर सकते है।

इसे कुछ केस से समझने का प्रयास करते है।

#1 मान लिया जाए आपके साइट को ऐसा विजिटर विजिट करता है, जिसे साइट को ठीक तरह से नविगेट (कंटेंट खोजना) नहीं आता है।

वह आपके ब्लॉग पर इंटरनल लिंकिंग से जुड़ा फैंस्टिक पोस्ट पढ़ता है, पर उसे अब एक्सटर्नल लिंकिंग के बारे में पढ़ना है।

पर किसी साइट में इसे खोजे, यह बात उस पाता नहीं है और इसी वजह से वह बैक करके साइट एग्जिट कर देता है।

#2 दूसरे केस में जब यूजर इंटरनल लिंक के बारे में पढ़ रहा था, तब उसे एक्सटर्नल लिंकिंग से जुड़ा एक लिंक कंटेंट के साथ ही मिलता है।

इंटरनल लिंकिंग का पोस्ट पढ़ने के बाद, वह एक्सटर्नल लिंक पर क्लिक करके, दूसरे पोस्ट पर पहुंच जाता है, जो एक्सटर्नल लिंकिंग पर है।

तो आप दूसरे केस से समझ सकते है कि कैसे इंटरनल लिंक का इस्तेमाल बाउंस रेट को कम करने में कर सकते है।

कॉन्टेंट क्वॉलिटी

मेरा हिसाब से इंटरनल लिंक, कंटेंट के क्वालिटी को भी अच्छे से सुधारने में काफी हद तक मदद करता है।

जहाँ तक बात से छोटे पोस्ट का तो उसे अट्रैक्टिव बनाने के लिए (हेडिंग, इमेजेज, विडियोज, कोट्स) का इस्तेमाल कर सकते है।

पर लंबे पोस्ट को अट्रैक्टिव बनाना आसान नहीं है, क्योंकि आप बेवजह फालतू के इमेजेस, विडियोज का इस्तेमाल नहीं कर सकते है।

तो इसमें इंटरनल लिंक का इस्तेमाल बहुत फायदेमंद साबित होता है।

जैसे अगर कंटेंट के नॉर्मल टेक्स्ट का कलर ब्लैक है, तो लिंक का कलर ब्लू या रेड कर देने से कंटेंट का लुक काफी बेहतर हो जाता है।

आप चाहे तो,

Dashboard >> Appearance >> Customize >>Additional CSS में जाकर a {color:ColorName;} का कोड इस्तेमाल कर सकते है।

यह सभी लिंक का कलर चेंज कर देता है।

ऑथोरिटी पासिंग

जब आप किसी पेज को दूसरे पेज से कनेक्ट करते है, तो लिंक्ड पेज, जोड़े गए पास के साथ ऑथोरिटी (रैंकिंग फैक्टर) शेयर करते है और इस तरह आप न्यू पेज के साथ ओल्ड पेज भी बेहतर परफॉर्म करता है।

Backlinko के अनुसार

Internal links can send page authority (also known as PageRank) to important pages.

तो इंटरनल लिंक किसी पेज को सर्च पेज में बेहतर रैंक करने में भी मदद करता है।

इसके अलावा नए पेज में, लिंक हमेशा हाई UR (URL Rating) वाला जोड़े, यह आपके नए पेज को जल्दी से रैंक करने में मदद करता है।

सामान्यत: जिस पेज का बैकलिंक प्रोफाइल (नंबर ऑफ बैकलिंक और क्वालिटी ऑफ बैकलिंक) ज्यादा होता है, उसका UR भी ज्यादा होता है।

किसी साइट के कौन से पेज का UR ज्यादा है, इसे Ahrefs के साइट से चेक किया जा सकता है।

इसके लिए पहले इसके साइट को विजिट करे, इसके बाद लॉगिन करे, अगर पहले से अकाउंट रजिस्टर नहीं है, तो रजिस्टर कर ले।

सक्सेसफुली लॉगिन के बाद।

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यहां पर मेरे डोमेन नेम के जगह अपना डोमेन डाले।

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इसके बाद यहां ऊपर Internal backlinks पर क्लिक करे।

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यहां लाल घेरे में आप पेज का UR चेक कर सकते है, चूंकि मेरा यह ब्लॉग नया है इसी वजह से 0 दिखा रहा है।

नोट: किसी तरह का वेबसाइट चैकिंग करने से पहले, आपको उस ब्लॉग का ओनरशिप वेरीफाई करना होगा और इसी वजह से सिर्फ आप खुद का ही ब्लॉग या वेबसाइट चेक कर सकते है, दूसरे का नहीं।

इंप्रूव इंटरनल लिंकिंग

जैसा कि अब तक मैंने इसके फायदे के बारे में बता दिया है, पर सिंगल पोस्ट में कितना और कैसा लिंक जोड़ा जाए, इसके बारे में नहीं बताया ह।

लेंथ

तो किसी पोस्ट में लिंक्स हमेशा हिसाब से, आवश्कतानुसार जोड़ना चाहिए।

WebFX के अनुसार

search engines will only crawl around 150 links on each page before they stop spidering pages linked from the original page.

flexible, and high authority pages may have 200-250 links followed.

तो गूगल गाइडलाइन के मुताबिक नॉर्मल कंटेंट के लिए 150 तक इंटरनल लिंक काफी है और इससे ज्यादा होने पर गूगल बोट पेज क्रॉल करना बंद कर देता है।

लेकिन लंबे, डिस्क्रिप्टिव पोस्ट में 200-250 तक इंटरनल लिंक का इस्तेमाल किया जा सकता है।

एंकर टेक्स्ट

इसके बारे में पहले ही बता दिया है कि एंकर टेक्स्ट क्या होता है, लेकिन इसका इस्तेमाल हमेशा हिसाब से करना चाहिए।

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वैसे तो इसका मिनिमम या मैक्सिमम लेंथ कितना होना चाहिए, इसका कोई ऑफिसियल गाइडलाईन नहीं है, पर तीन वर्डस का एंकर टेक्स्ट सबसे ज्यादा ऑर्गेनिक ट्रैफिक पाता है।

इसके अलावा अलग यूआरएल के लिए एक ही एंकर टेक्स्ट का इस्तेमाल नहीं करे।

वैसे तो कोई ऑफिसियल गाइडलाइन इसके लिए भी क्या एक ही एंकर टेक्स्ट का इस्तेमाल करने से कोई पेनेलाइज भी किया जा सकता है।

लेकिन गूगल इंजीनियर Matt Cutts के अनुसार 2009 में (एक ही जैसा एंकर टेक्स्ट होने पर पहले वाले को इंडेक्स किया जाता था, पर दूसरे को इग्नोर)।

कीवर्ड्स

बहुतों को लगता होगा कि इंटरनल लिंक में भला कोई कीवर्ड का इस्तेमाल कैसे किया जा सकता है।

पर ऐसा कतई नहीं है।

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क्योंकि गूगल ने अपने गाइडलाइन में बिना मतलब के इंटरनल लिंक कीवर्ड इस्तेमाल करने के लिए मना किया है।

यह इस बात को भी साबित करता है कि एंकर में कीवर्ड का भी इस्तेमाल जरूरी है।

लास्ट वर्डस

आई होप, आपने अगर आज के इस पोस्ट को पढ़ा होगा, तो एन्जॉय जरुर किया होगा।

वैसे हो सकता है, इस पोस्ट में बहुत से पार्टस हमसे छूट गया होगा, पर इसे पूरा कवर करने की कोशिश किया गया है।

तो पोस्ट पसंद आने पर इसे अपने सोशल साइट में जरुर शेयर करके मुझे सपोर्ट करे।

शेयर करने के लिए ऑप्शन आपको पोस्ट के सबसे लास्ट में मिल जाए, जिस पर क्लिक करके करेंट पोस्ट को शेयर कर सकते है।

अंत में इस पोस्ट को पढ़ने के लिए धन्यवाद।

6 thoughts on “Internal Linking क्या है और इसे बनाने से क्या फायदा होता है”

  1. Apne is post me aapne bahut hi achchi jankari bataya hai…

    Mera bhi ek blog hai jisme share market and mutual funds ke bare me jankari diya jata hai…

    Reply

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